हाजिरी लिस्ट में नाम “iPhone” चमक रहा था। टीचर ने दो बार पुकारा, जवाब नहीं मिला क्योंकि मालिक म्यूट था और नाम बदला नहीं था। Meet के बटन से ज्यादा ये छोटी बातें फर्क करती हैं।

लिंक से पहले

कैलेंडर या मेल का लिंक, अजनबी संदेश का नहीं। नकली रूम होते हैं, पता पढ़ना सीखो। उपस्थिति वाले कागज जैसा नाम। कैमरा आंख के स्तर पर — किताबों का ढेर काम आ जाता है। खिड़की पीठ पीछे हो तो चेहरा काला। हेडफोन गूंज कम करता है। तार हो तो तार, नहीं तो राउटर के पास, हॉटस्पॉट जेब में। वाई-फाई। वीडियो वाले टैब बंद करके जुड़ो।

भीड़ हो तो म्यूट

बोलोगे तब खोलना। चैट हाजिरी या लिंक के लिए, मीम के लिए नहीं। खाना, दूसरा वीडियो, बाहर चीखना — माइक पकड़ लेता है। सवाल हो तो हाथ या एक शब्द चैट। इंटरव्यू में नोट्स बड़े अक्षर, आंख कैमरे पर। पीछे कोई जवाब लिखवाए तो अक्सर दिख जाता है।

पूरा डेस्कटॉप मत

एक विंडो या टैब। नोटिफिकेशन बंद। स्लाइड Slideshow में, स्पीकर नोट्स वाली स्क्रीन नहीं — टिप्पणियां कक्षा को दिख सकती हैं। एक्सेल का ज़ूम पीछे वालों के लिए बढ़ाओ। शेयर बंद करना भूलना आम है। रिकॉर्ड बिना पूछे मत दबाना। कट जाए तो वही लिंक, नया रूम मत बनाना। फोन से बैकअप, नाम वही। डेटा कम हो तो पहले पूछकर कैमरा बंद। वर्चुअल बैकग्राउंड कमजोर लैपटॉप पर काटता है, सादी दीवार सस्ती और साफ।