हमारे यहां राउटर किचन की अलमारी में था, बर्तनों के पीछे। फोन कमरे में मीट काटता था, तार से स्पीड ठीक थी। जादू नहीं था। जगह, भीड़, पुराना रीबूट था। Jio हो या लोकल, जांच ये ही रहती है।
दो बक्से
राउटर और फाइबर वाला छोटा बॉक्स — प्लग निकल, तीस सेकंड, बत्तियां स्थिर। सिर्फ फोन का टॉगल काफी नहीं। महीने में एक बार। परीक्षा की सुबह नहीं, एक रात पहले।
ऊंचा, खुला
धातु, फर्श का कोना, बंद लकड़ी सिग्नल खाते हैं। एक कमरे से घर के उस सिरे तक 4K मत मांगो। मेश महंगा हल है, पहले दूरी घटाओ। मछलीघर और बड़े दर्पण भी अड़चन डालते हैं — ये बात जान लेना काफी है।
दो नाम दिखें तो
5 तेज और नजदीक, 2.4 दीवार पार और धीमा। पास बैठे हो तो 5। पुराना टीवी स्टिक अक्सर 2.4 पर रह जाता है। रात आठ बजे पड़ोस के नेटवर्क भीड़ करते हैं। एडमिन पासवर्ड डिफ़ॉल्ट मत छोड़ना। मेहमानों को गेस्ट नेट दो अगर बॉक्स देता है।
कब सच में कॉल करो
लाल ऑप्टिकल, केबल कटी, तार से भी स्पीड मरी — तब। वाई-फाई कमजोर और तार तेज हो तो घर का वायरलेस दोषी है। प्लान की सीमा शाम को दिखती है। अजनबी “फ्री नेट” ऐप से DNS मत बदलना। हॉटस्पॉट कभी मजबूत लगता है, डेटा और परीक्षा नियम देखना। पड़ोस का खुला नेटवर्क चोरी अवैध भी है, अस्थिर भी। पुराना राउटर गरम हो और एक कमरे में भी न चले तब नया सोचना, पहले जगह ठीक करो।