दो उंगली, कीबोर्ड की तरफ देखना — शुरुआत में तेज लगता है। छह महीने बाद वही छत। आंखें स्क्रीन पर हों, हाथ घर की पंक्ति पर। हिंदी हो या अंग्रेजी, ये एक बात है।

कपड़ा डाल देना

बीस मिनट अभ्यास में चाबियां मत देखो। गलती पर बैकस्पेस की झड़ी लय तोड़ती है। रोज थोड़ा, हफ्ते में एक बार पांच घंटे नहीं। परीक्षा में ऑटो टाइप वाली चाल मत। कुर्सी पर कलाई सीधी, गोद में लैपटॉप दर्द देता है। फोन की स्वाइप टाइपिंग कंप्यूटर नहीं सिखाती।

पहले सही, फिर तेज

ASDF JKL; एक हफ्ता। फिर ऊपर-नीचे। तीस-चालीस सही शब्द छात्र काम के लिए चल जाते हैं; नौकरी टेस्ट अपना लक्ष्य पूछते हैं। गाने के बोल से बेहतर समाचार के छोटे वाक्य — विराम चिह्न असली मेल में आते हैं।

दो रास्ते

फोनेटिक: namaste से नमस्ते, अंग्रेजी चाबी आती हो तो तेज। इंस्क्रिप्ट स्वतंत्र है, हफ्ते लगते हैं। जो पोर्टल मांगे वो पकड़ो। हलंत और चंद्रबिंदु अर्थ बदल देते हैं। नाम आधार वाली वर्तनी से मिलाओ। क्रुतिदेव आज टूटता है, यूनिकोड रखो।

चार हफ्ते जैसा मैंने चलाया

पहला: मूल पंक्ति। दूसरा: छोटे मेल। तीसरा: आंकड़े। चौथा: पांच मिनट की जांच, तुलना खुद से। विज्ञापन वाले “सौ शब्द रातोंरात” को हल्के में लो। दर्द हो तो रुको। आवाज से टाइप नोट्स के लिए चल सकता है, पासवर्ड और फॉर्म के लिए नहीं।