कॉलेज के पहले हफ्ते में मैंने जो ईमेल बनाए देखे, उनमें से आधे रिज्यूमे पर नहीं चढ़ सकते थे। एक लड़के का पता क्रिकेटर के नाम पर था, एक के में 2004 लिखा था। अकाउंट बनाना आसान है। मुश्किल तब होती है जब सिम बदल जाए या लैब वाला कंप्यूटर आपका पासवर्ड याद रख ले।

बनाने से पहले जो मैं पूछता हूं

यह पता सिर्फ YouTube के लिए है या टीचर को भी जाएगा? दोनों एक जगह चल सकते हैं, लेकिन नाम तब शांत रखना पड़ता है। दूसरा सवाल: जो नंबर डाल रहे हो, क्या वो दो साल बाद भी तुम्हारा रहेगा? घर में सिम स्वैप होना आम बात है। नंबर की फोटो व्हाट्सऐप पर न रखो; कागज या बंद नोट काफी है।

तीसरा: रिकवरी ईमेल। बहुत लोग खाली छोड़ देते हैं, फिर लॉक होने पर रोते हैं। मम्मी-पापा का पता चल सकता है अगर वो पासवर्ड नहीं मांगेंगे। या पहले एक सादा अकाउंट बनाकर दूसरे की रिकवरी में लगा दो। जल्दीबाजी में भाई का नंबर डालना बाद में झगड़ा बनता है — नियंत्रण अपने पास रखो, मदद लेना अलग बात है।

नाम का छोटा टेस्ट

मैं यूजरनेम चुनते समय यही करता हूं: कल्पना करो टीचर उस पते को क्लास में जोर से पढ़ रहे हैं। हंसी आए तो मत बनाओ। riya.mehta.work जैसा कुछ चल जाता है। loverboy या पूरे जन्मदिन वाली संख्या बाद में अटकती है। नाम आम हो और पता ले लिया गया हो तो बीच में डॉट या गांव-शहर का छोटा संकेत आजमाओ। पूरा आधार नंबर ईमेल में मत डालना।

जो कदम मैं सच में फॉलो करवाता हूं

ब्राउज़र में Google का अपना पेज खोलो। किसी अजीब साइट पर “फ्री जीमेल रजिस्टर” लिखकर मत घुसो — पता बार खुद पढ़ो। नाम वैसा लिखो जैसा फॉर्म पर है, वरना Meet पर और सर्टिफिकेट पर फर्क दिखेगा।

पासवर्ड फेसबुक वाला मत दोहराओ। अगर तिजोरी अभी दूर लगती है तो कम से कम ईमेल वाला अलग रखो; मैनेजर वाला लेख बाद में पढ़ लेना। फोन नंबर जोड़ो। स्किप दिखे तो भी मैं स्किप नहीं करने को कहता हूं। लैब या साइबर कैफे में Remember me मत दबाना। घर के फोन पर Gmail ऐप प्ले स्टोर से लगाना।

निजता वाले टिक बॉक्स लोग बिना पढ़े छोड़ देते हैं। इतिहास चलाना मजबूरी नहीं है। छात्र अकाउंट में सुझाव आते रहेंगे, वो अलग बात है।

पासवर्ड अकेला अब कम लगता है

Drive, फोटो, कभी-कभी कॉलेज लॉगिन — सब एक खाते से बंधे होते हैं। 2-Step चालू करो। SMS से Authenticator बेहतर लगता है, क्योंकि सिम किसी और के नाम पर भी जा सकती है। बैकअप कोड गैलरी में स्क्रीनशॉट मत रखना; दराज में कागज रखो।

पुराना फोन बेचने से पहले साइन आउट। साल में एक बार Security checkup खोलकर पुराने डिवाइस हटा देना छोटी आदत है, पर काम की है। और हां — फोन पर “Google से OTP दो” कहने वाला कोई कर्मचारी नहीं होता। वो चाल स्कैम वाले पेज पर लिखी है।

लैब में जो बार-बार होता है

सेशन खुला छोड़कर कैंटीन चले जाना। घर के टैबलेट पर सबके पासवर्ड सेव रहना। दस लोगों का YouTube एक ही अकाउंट से — सुझाव भी गड़बड़, सुरक्षा भी। पुराना मजाकिया पता हो तो नया शांत अकाउंट बनाकर पुराने से फॉरवर्डिंग लगा सकते हो। रिज्यूमे पर नया ही लिखना। पता मारने की जरूरत नहीं, बस उसे सामने मत रखना।

एक व्यक्ति कई अकाउंट बना सकता है। इतने मत बनाना कि खुद भूल जाओ। यूजरनेम बाद में लगभग वैसा ही रहता है, इसलिए पहली बार सोच लेना सस्ता पड़ता है।