फोन “स्टोरेज फुल” दिखाकर खुद फोटो मिटाता है। चोरी तो अलग कहानी है। मार्कशीट और दादी की शादी वाली तस्वीर एक ही जगह हों तो एक दिन काफी है नुकसान हो जाने को। बैकअप ऐप का नाम नहीं, आदत का नाम है।

तीन कॉपी जितना दिमाग में रहे

फोन, क्लाउड, और एक पेनड्राइव रिश्तेदार के घर। सिर्फ व्हाट्सऐप पर दस्तावेज़ भेजना नकल नहीं — दब जाता है, ग्रुप में घूमता है। क्लाउड और फोन अलग जगहें हैं। फोन गया तो क्लाउड बचाता है अगर पासवर्ड याद हो।

Backup complete लिखने से काम नहीं

वाई-फाई पर Photos चालू करो, फिर कंप्यूटर की वेब पर पुरानी एलबम खोलकर देखो कि है भी या नहीं। लॉक फोल्डर बैकअप में शामिल है या नहीं, सेटिंग पढ़ो। साल में एक बार जरूरी तस्वीर डिस्क पर। स्क्रीनशॉट हटाओ, वरना सच की फोटो दबती हैं।

आधार प्रोजेक्ट फोल्डर में नहीं

IDs_private, लिंक Anyone नहीं। प्रोजेक्ट Drive के ढांचे में। ZIP का पासवर्ड चैट में नहीं, कागज पर। “बैकअप भर गया, OTP डालो” वाला SMS ऐप के अंदर से चेक करो, लिंक से नहीं।

एक फाइल अभी निकालो

नया फोन आने का इंतजार मत करो। PDF डाउनलोड करके खोलो। Online only फाइल ऑफलाइन परीक्षा में गायब रहती है। घर के बुजुर्गों का मीडिया उनके खाते में जा सकता है — सिखाना ठीक, उनका OTP मांगना नहीं। वीडियो सारी 4K क्लाउड पर मत ठूसना, दस्तावेज़ पहले। पेनड्राइव अकेली तिजोरी नहीं। अपने मेल पर PDF भेजना आपात है, सिस्टम नहीं।