दीवार का रंगीन चार्ट मैंने भी बनाया था। सुबह चार बजे वाला। तीन दिन चला, फिर अपराधबोध। जो टाइमटेबल जीवन में न उतरे, वो पोस्टर है। यहां चार बजे की शर्त नहीं है। हफ्ते में घंटे लगें, और छूटने पर वापस आने का रास्ता हो — बस।

तीन दिन ईमानदारी

कॉलेज, बस, खाना, स्क्रीन, नींद लिखो। बचे स्लॉट पूंजी हैं। जहां दो घंटे हैं वहां आठ मत लिखना। परीक्षा पास हो तो बढ़ाना। एक दिन में तीन विषय गहरे कम ही समाते हैं। नोट्स की आदत अलग पेज पर है, टाइमटेबल उससे जुड़ता है।

“पढ़ाई” मत लिखो

लिखो: Accounts, illustration 4 से 9। खत्म न हो तो खाने से पहले एक वाक्य — कल कहां से। संदेश उस खिड़की में बंद। घर वालों को बता दो। कठिन विषय उस समय जब तुम सच में जागे हो। सबकी सुबह नहीं होती, ये आलस नहीं, शरीर है।

रविवार आधा घंटा

क्या हुआ, क्या नहीं। अधूरा ब्लॉक पाप नहीं, आंकड़ा है। बाहर घूमना भी लिखो, ताकि “अचानक” न खा जाए। ऑनलाइन क्लास को मल्टीटास्क मत समझना। मशीन से प्लान बनवाना चल सकता है, पालन तुम करोगे। पाठ्यक्रम से जांच AI वाले लेख में है।

दो दिन डूबे

नया चार्ट मत खींचो। आज 25 मिनट। यात्रा पर हल्का दोहराना, घर पर लिखना। सहपाठी से कम, कल वाले खुद से ज्यादा तुलना। नौकरी साथ हो तो लक्ष्य घंटे पूरे करने के, विषय खत्म करने के नहीं। ऐप बदलते रहना टालमटोल है, कागज चलता है। छुट्टी का पूरा शून्य भी ठीक, सोमवार का पहला ब्लॉक लिखा हो तो।